learn computer


Computer सीखना क्यों ज़रूरी है?



learn computer in hindi

Computer Computer  Computer आपने इस शब्द को बहुत बार जरूर सुना होगा। हो सकता है कि आपको इसकी आवश्यकता भी कभी ना कभी जरूर पड़ी होगी। और पड़े भी क्यो ना? आज के समय में अधिकतम कार्य इसी की सहायता से ही किया जा रहा है। आज के समय में यह आपको हर जगह आसानी से देखने को मिल जाएगा। और इसीलिए आज के समय में Computer की जानकारी रखना बहुत ही आवश्यक हो गया है। और क्योंकि हम लोग 21वीं सदी में हैं तो यदि इसे हम Compute की सदी कहें तो शायद गलत नही होगा। वर्तमान और भविष्य के नजरिये से देखा जाए तो आज इसकी जानकारी वैसे तो सभी को होनी चाहिए लेकिन विशेष रूप से विद्यार्थी वर्ग को ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए ये उनके लिए अति आवश्यक है। क्योंकि आज स्कूल या कालेजों में अधिकतर कार्य Computer के द्वारा ही किया जा रहा हैै। स्कूल-कालेज में हर छोटे-बड़े कार्य इसकी ही मदद से ही किये जा रहे हैं। हालांकि मौजूदा समय में ये देखा जा रहा है कि विद्यार्थी वर्ग इसकी ट्रेनिंग ले रहे है स्कूल/कालेज या किसी संस्थान में, जो कि एक बहुत ही अच्छी बात है। इसके अलावा भी बहुत सारे लोग है जो इसको सीखने की इच्छा रखते है और केवल इच्छा रखते है बल्कि सीख भी रहे हैं। जो कि बहुत प्रसंसनीय है। और आगे सफल भी होते है लेकिन इसमें एक बड़ा वर्ग इसमें असफल भी होता है जो कि एक कड़वी सच्चाई है। क्यो इनमें से अधिकतर लोग ज्यादा कुछ सीख नही पाते है या क्यो वो बीच में ही इसे छोड़ देते है या सीखने के बावजूद वो भविष्य में रिजेक्शन का सामना करते है। इसके कुछ कारण आप अवश्य जानते होंगे या अवश्य देखा होगा भले ही आपने उस पर ध्यान नही दिया होगा। तो चलिए बात करते है कुछ कारणों की-


Computer सीखने व सिखाने वाले 

learn computer in hindiप्रायः आपने देखा होगा कि स्कूल के कक्षा में या संस्थान की कक्षा में Computer को सीखने के लिए स्टूडेन्ट तो बहुत सारे आते है और काफी अच्छा भी लगता है कि हमारे विद्यार्थी कितना जागरूक है इसके प्रति जरूर ये आगे भविष्य में अच्छा करेंगे। लेकिन कुछ समय बाद ही उस कक्षा से इनकी संख्या धीरे-धीरे करके कम होने लगती है अर्थात अनुपस्थित होने लगते है क्योंकि इनमें से कुछ को तो बल्कि मै ये कहूँ कि अधिकतर को अंग्रेजी की ही शिकायत होती है वही कुछ को ये बहुत भारी लगता है कि भाई ये मेरे बस ही नही है वही कुछ तो केवल समय बिताने के लिए ही जाते है उनका कोई ध्यान ही नही होता है अब वही दूसरी तरफ कुछ ऐसा ही हाल स्कूल, कालेज संस्थान भी इसका ध्यान नही देते है कक्षा में कौन रहा है, कौन जा रहा है या कौन क्या कर रहा है और कितना सीख रहा है क्या उसे समझ रहा है या नही इससे उन्हे कोई खास मतलब नही होता है। बस मंथ पूरा हुआ पैसे चाहिए। विद्यार्थियों का भी कुछ ऐसा ही हाल है उन्हे भी कोई फर्क नही पड़ता है क्या सीखाया जा रहा है कितना सिखाया जा रहा है कैसे सिखाया जा रहा है। उन्हें भी तो बस समय बीताना है। उन्हें भी इसको सीखने की कोई इच्छा ही नही होती है क्योकि जब टीचर कुछ सिखाते या बताते है तो वो अपने में ही मस्त रहते है (ध्यान दें मै किसी व्यक्ति विशेष अथवा स्कूल/कालेज या संस्थान को नही कह रहा हूँ। मेरा बिल्कुल भी इरादा किसी को भी ठेस पहुंचाने का नही है लेकिन फिर भी यदि आपमे से किसी को मेरी बातों से ठेस पहुंचा हो तो इसके लिए मै क्षमा चाहुंगा।) अब वही कुछ विद्यार्थी उसी में ऐसे भी होते है जिन्हें ये एक लक्ष्य की तरह लगता है या ये कहूँ कि वह इसे एक लक्ष्य की तरह लेते है और पूरा जोर लगा देते है इसे सीखने के लिए ताकि कही से भी कोई कमी रह जाए। वो अपने समय का पूर्ण उपयोग करते है और वही उनके इस लगन को देख कर उस स्कूल/कालेज या संस्थान के टीचर भी उनकी पूरी मदद करते है। आज शिक्षा (एजूकेशन) की स्थिति हमारे देश में बहुत ही खराब है यह एक प्रकार से पैसे कमाने का व्यवसाय सा बन गया है। क्योकि बड़े स्तर पर पढ़ाई तो अच्छी है लेकिन उनकी फीस मध्यम वर्ग के लिए आज भी एक चिन्ता का विषय है क्योकि वे उतना वहन नही सकते हैं। जो कि एक कड़वा सत्य है जिसे आप भी जानते है।
 चूंकि हमारा टॉपिक Computer का है तो हम इसी विषय पर बात करेंगे-



Computer संस्थानों के कोर्स व समय 



learn computer
जैसा कि आप जानते है कि केवल स्कूल या कालेज के सीखा देने भर से काम नही चल जाता है इसलिए लोग अपने बच्चों को अधिक जानकारी हेतु Computer Institute मे दाखिला दिलवाते है ताकि उनके बच्चें और अधिक सीख सकें। और इसीलिए आज Computer संस्थानों में एक से बढ़कर एक कोर्स उपलब्ध है जो कि 1 महिने से लेकर के 12 महिनों तक का या उससे भी ज्यादा का है। मै बेसिक कोर्स की बात कर रहा हूँ। अब आप लोगों ने देखा होगा कि कुछ लोग 1 महिने वाला कोर्स करने आते है अब जरा बताइये की भला एक महिने में आप क्या सीख लेंगे 1 महिना तो आपको आते-जाते ही बीत जाएगा तो आप सीखेंगे क्या। वही कुछ लोग 3 महिने का कोर्स करने आते है 3 महीने का समय तो समझते-समझते ही बीत जाएगा। उसी प्रकार 6 महिने वाला और 12 महिने वाला कोर्स भी बहुत लोग करने आते है कम से कम 6 महिने वाला या 12 महिने वाला कोर्स तो ठीक है कम से कम आप कुछ सीख तो पायेंगे मै ये नही कहता की आप सब कुछ सीख जाएगें लेकिन ये भी नही कहता कि सब सीख जायेंगे कम से कम आपको बेसिक जानकारी तो आपको सीखा ही दिया जाएगा। अब ये निर्भर करता है आपके संस्थान के ऊपर और आपने टीचर के ऊपर की वो कैसे सिखाते बताते है। और उससे भी ज्यादा आप पर कि आप कितने चाव से सीखते है। क्योंकि अधिकतर संस्थान हर दिन प्रैक्टिकल नही कराती है हफ्ते कें आधे से ज्यादा दिन वो थ्योरी फण्डामेन्टल ही बताते है और बाकी दिन प्रैक्टिकल। 6-12 महिने वाले कोर्स में अधिकतर संस्थान में पूरा नही कराया जाता है कुछ कुछ छूट ही जाता है तो वही कुछ संस्थानों में इसे अन्तिम समय में स्पीड के साथ पूरा कराया जाता है जो कि ज्यादातर स्टूडेण्ट्स को समझ ही नही आता है। कुछ संस्थानों में कुछ स्टूडेण्ट सीखने के लिए आते है तो वही कुछ तो सिर्फ प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए आते है। लेकिन वही कुछ संस्थानों में हर कोर्स समय पर करा दिया जाता है। जिसके कारण कभी-कभी होता क्या है कि जिसने अच्छे से सीखा होता है वो तो मान लो कही किसी जॉब के लिए अप्लाई करते है वो तो पास हो जाता है साक्षात्कार इत्यादि तक निकाल ले जाते है लेकिन जिसने सिर्फ समय व्यतीत किया हो वो उनका क्या होता है ऐसे लोग साक्षात्कार तक नही निकाल पाते क्योकि वे उनके सवालों के जवाब ही नही दे पाते नौकरी की बात तो छोड़िए ऐसे लोग बार-बार रिजेक्शन का सामना करते फिरते है। और बाद में कहते है कि मै बेरोजगार हूँ। और वही दूसरी तरफ वो भी लोग होते है जो अच्छे से सीखे होते है उन्हें सिर्फ साक्षात्कार में बल्कि नौकरी तक पा लेते है।

परिणाम 

how to learn computer in hindi
अब आप लोगों के मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि ये सब मै आप लोगों को क्यो बता रहा हूँ। तो आपको मै बता दूं कि जब मै Computer सीखता था तो प्रायः ये सब चीजें देखा करता था। और इन सबके बारे में सोचा करता था कि ये लोग क्लास करने रहे है या टाइम पास करने। जब मै सीखा करता था तो उस बैच में बहुत सारे लोग आया करते थे कुछ तो मेरे पहले के थे तो वही कुछ मेरे साथ के थे, और वही कुछ मेरे बाद के भी थे। ढ़ेर सारे लोग होते थे। लेकिन समय के साथ-साथ लोग धीरे-धीरे कम होते गए। 3-4 महिने का भी समय नही गुजरा होगा आधे स्टूडेण्ट्स का अता पता लापता हो गया था। और जो आते भी थे तो उनकी उपस्थिति लगातार की नही थी। क्लास में आकर इधर-उधर की बाते करते और टाइम बीत जाने के बाद चले जाते। क्योंकि मै उस समय बहुत ही मेहनत करके किसी तरीके से फीस भरता था। इसलिए मुझे उस पैसे की कीमत पता थी। और मेरे मन में इसको (Computer) को सीखने की जल्दी भी थी। क्योंकि पैसे अरेन्ज करने में बड़ा दिक्कत होता था। 30 दिन कब बीत जाए पता ही चलें। और जैसा कि मैने आपको बताया की छोटे संस्थानों का क्या हाल होता है। ठीक से वहां आपको सीखाया नही जाता है। क्योकि मैने कई स्टूडेण्ट को वहां देखा जो दूसरे संस्थान को छोड़कर इसमें आये थे। तो मै उनसे पूछता था कि क्यो छोड़ दिया, क्या कारण था इत्यादि वे तो यही कहते थे कि वहां बढ़िया तरिके से नही सीखाया जा रहा था। लेकिन जब मैने उन्हें नोटिस करना शुरू किया तो मैने पाया कि वे प्रायः टाईप पास कर रहे थे। चलिए चलते है अपनी बात पर तो कोर्स पूरा होने तक को था और अब संस्थान में कुल मिलाकर 4-5 लोग ही बचे थे। कही कहीं मुझे इस बात का एहसास हो रहा था कि कही ऐसा हो कि कोर्स अधुरा रह जाए। अब क्योकि स्टूडेण्ट्स कम थे तो सर का भी मन नही करता था। रोज वही पुराना रिपीट करो कह कर चले जाते थे या जाओ थ्योरी लिख लो इत्यादि बातों से दिन बीतता गया और अन्त में वही हुआ जिसका डर था कोर्स अधूरा ही रह गया। कुछ दिन बाद ही वो Computer संस्थान भी बन्द हो गया। जिसका कारण ये बताया गया की उस बिल्डिंग के ऑनर ने किराया बढ़ा दिया जो उनके बजट से बाहर था वगैरह-वगैरह। बाद में मैंने दूसरे Computer संस्थान में अपना एडमिशन लिया छूटे हुए कोर्स को पूरा करने के लिए। लेकिन वहां की फीस थोड़ी ज्यादा थी थोड़ी ज्यादा क्या दोगुनी थी। और हाल वही जो पुराने वाले में था इस कारण से मैंने जल्द ही उस संस्थान को भी छोड़ दिया। लेकिन उसी दौरान मेरी मुलाकात एक लड़के से हुई जो कि Computer का काफी जानकार था और जो कोर्स मेरा छूट गया था वो उसमें एक्सपर्ट था मैने सोचा था कि उस बचे हुए कोर्स को उसकी मदद से पूरा कर लूंगा। लेकिन ऐसा हो सका। क्योंकि वो भी कही जॉब ही करता था तो मै उसके वहां जाया करता था ताकि सीख लूँ लेकिन उसके ऑनर इस बात पर एतराज करते थे और उन्होने उसे मनाकर दिया की उस लड़के को यहां मत बुलाया करो उसने मुझे साफ-साफ बता दिया मैने भी सोचा की ठीक ही तो कह रहे हैं तुम उनका काम करोगे की मुझे सीखाओगे और इसे उचित समझते हुए उसके यहां जाना छोड़ दिया। लेकिन उसी की हेल्प से मै आज उसी फिल्ड में हूँ और वो सारी चीजे मैने सीख ली और और ही सीख ली बल्कि कार्य भी कर रहा हूँ यानि ये मेरा प्रोफेशन भी बन चुका है। हालांकि मैने उसके लिए काफी दिक्कतों का सामना किया। आप कितना पैसा या सैलरी पाते है ये बाते मैटर नही करती हैं। मैटर ये करता है कि जिस चीज के लिए आपने मेहनत की उसमें आपको कामयाबी हासिल हुई या नही। अब जरा सोचिए जो लोग टाइम पास करते है या अच्छे से नही सीखते हैं उनका क्या हाल होता होगा।


निष्कर्ष /निवेदन 

बात करें निष्कर्ष की तो आपने अभी उपर में जो पढ़ा उसको देखते हुए निष्कर्ष बताने की जरूरत मुझे लगता है कि नही है। और रही बात निवेदन कि तो बस यही कहना चाहुँगा कि किसी भी काम को मन लगाकर करना या सीखना चाहिए चाहे आप जिस भी फिल्ड में हो आपको उसकी अधिक से अधिक जानकारी रखनी चाहिए और हमेशा उसमे नई-नई चीजों के बारे में जानकारी खोजनी चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर आप भी किसी को बता सकें। और इस प्रकार आप जरूर भविष्य में सफल होंगे क्योकि जिन्दगी भी हमें हर दिन कुछ कुछ नया सीखाती ही रहती है। इसलिए कभी ये आपको नही लगना चाहिए कि मैने बहुत कुछ सीख लिया है या मुझे बहुत ज्यादा गया है अब मुझे और सीखने की आवश्यकता नही है बस उसी दिन से आपकी जानकारी में वही पर अटक जाएगी और आउटडेटेड हो जाएंगें क्यांकि आज हर दिन कुछ कुछ नया रहा है। इसीलिए अपने आप को अपडेट रखना बहुत ही जरूरी है वो कहावत है , अधुरी जानकारी बहुत ही खतरनाक होती है। इसलिए हमें हमेशा कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए।

मै शमीम अहमद दिल से आपका बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँनमस्कार   

8 Comments

Please do not enter any type of spam or link in the comment box

Post a Comment

Please do not enter any type of spam or link in the comment box

Previous Post Next Post