what is serial ata sata in hindi

What is Serial ATA SATA?


दोस्तों, Hard Disk क्या है? कैसे काम करता है? और कितने प्रकार का होता है? इत्यादि बातें हम अपने पिछले पोस्ट Parallel ATA PATA वाले में जान चुके हैं।

यदि आपने उस पोस्ट को नहीं देखा तो नीचे दिये लिंक पर क्लीक करके उसे जरूर देखें ताकि ये वाला पोस्ट आपको अच्छे से समझ आयें। ये पोस्ट एक प्रकार से उसका दूसरा भाग है।

What is PATA?


आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे कि Serial ATA क्या है?  इसके Advantage और Disadvantage क्या है? इत्यादि के बारे में।
तो चलिए जानते हैं-

Serial Advanced Technology Attachment (SATA)

serial ata sata in hindi


Serial ATA को जानने से पहले ये जान लेते हैं कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी? PATA के बारे में यदि आपने पड़ा होगा तो आपको पता होगा कि PATA की Speed ही उसकी सबसे बड़ी कमी थी। इसके Last Revision की भी Speed 133 MBPS ही थी और इसमें इससे ज्यादा की स्पीड नहीं बढ़ाई जा सकती थी जो कि एक बड़ी प्राॅब्लम थी।

इन्हीं सब बातों को देखते हुए 2003 में एक नया Interface लांच किया गया जो कि Serial ATA यानि SATA था। हालांकि Announcement तो सन् 2000 में ही कर दिया गया था लेकिन फाइनली लांच 2003 में हुआ। इस Hard Disk में जो नया Interface का यूज किया गया था वो PATA की अपेक्षा काफी छोटा था। 

PATA वाला Interface आपने देखा होगा कितना चौड़ा होता था पूरे Hard Disk को कवर कर लेता है और वैसे ही कुछ Motherboard पर भी। और Cable भी कितना चौड़ा हुआ करता था जो कि काफी स्पेस लेता था तो इस Interface में इन सब Problems को दूर किया गया। इस Interface के साथ एक नया Cable भी लांच किया गया जो कि SATA Cable था। SATA Cable PATA की अपेक्षा काफी छोटा और फास्ट था और और इस नये Interface के लिए एक नये Protocol भी Introduce किया गया जिसका नाम AHCI (Advanced Host Controller Interface) था।

इस नये वाले Interface की Speed 150 MBPS थी। जो कि PATA के Last Revision से ज्यादा थी।
लेकिन इसमें कुछ कमियां थी जैसे- Interface का कमजोर होना, Cable Connector का मजबुत न होना, आसानी से Cable का बाहर आ जाना और सबसे बड़ी कमी Speed का कम होना था। इसलिए इन कमियों को दूर करते हुए अगले ही वर्ष 2004 में इसका एक नया Revision 2.0 लांच किया गया। 

इस Revision में इसकी Speed को बढ़ाकर 300 MBPS कर दिया गया यानि पहले वाले से दोगुना और साथ ही इसके Cable को पहले की अपेक्षा मजबूत और Locking Mechanism के साथ लांच किया गया। 

एक Mechanical Structure के लिए 300 MBPS की Speed काफी ज्यादा थी। इसलिए ये Revision सभी में काफी पापुलर हुआ और काफी समय तक चलन में रहा बल्कि वर्तमान समय में भी है। 2004 से 2008 तक कोई नया Revision या Interface कन्ज्यूमर लेवल पर लांच नहीं किया गया हालांकि 2008 में एक नये Interface पर काम शुरू हो चुका था जिसे 2009 में SSD (Solid State Drive) के नाम से लांच किया गया। इसके साथ ही एक नया Revision 3.0 को लांच किया गया जिसकी Speed 600 MBPS थी। लेकिन ये नया Revision और Speed केवल SSD पर ही वर्क करता है।

ध्यान दें ऐसा नहीं है कि आप Hard Disk को SATA 3.0 Interface पर लगायेंगे तो वर्क नहीं करेगा, बिल्कुल करेगा लेकिन वैसे ही जैसे SATA 2.0 पर करता था। इस Confusion में बिल्कुल न रहें कि SATA 3.0 पर यदि Hard Disk लगा देंगे तो वो आपको 600 MBPS की Speed देने लग जाएगा। SATA का तीनों Revisions Backward Compatible है। लेकिन जिसकी जो स्पीड होगी वो उस पोर्ट पर मिलेगी। यानि यदि आपके पास SATA 1.0 है पहले तो आज के समय में SATA 1.0 किसी के पास होगा नहीं लेकिन यदि किसी के पास है तो वहां Hard Disk लगाने पर वो Speed 150 MBPS का ही देगा।

नोट-SSD क्या है? और इसका Revision 3.0 क्या है इत्यादि के बारे में हम अपने अगले पोस्ट में विस्तार से जानेंगे।



serial ata sata in hindi SATA Advantages

SATA का पहला Revision भी PATA के Last Revision से फास्ट था।
SATA के पहले Revision की Speed 150 MBPS थी।
SATA का Interface PATA के मुकाबले काफी छोटा था।
SATA Cable PATA की अपेक्षा काफी छोटा और बेहतर था।
SATA Cable में कुल 7 Pins ही होते हैं, PATA की तरह 40 Pins नहीं।
SATA पोर्ट काफी छोटे होते है जिस वजह से हमें ज्यादा Port मिल जाते है जबकि उतने में PATA का एक ही Port आया करता था।
SATA Cable के आने से Air Flow अच्छी तरह से हो पाता है।
SATA Cable में कई प्रकार के बदलाव किये गये जैसे- Cable को मजबूत किया गया, Locking Mechanism को Introduced किया गया।
SATA नये Protocol AHCI पर वर्क करता है।
SATA का Second Revision की Speed 300 MBPS है।
SATA आज भी यूज में है जबकि PATA Completely Out dated हो चुका है।
SATA के Hard Drive आसानी से कम प्राईज में उपलब्ध है।
SATA में सभी Disk के लिए अलग-अलग Cable लगती है। चाहे Hard Disk हो CD/DVD राइटर हो।


serial ata sata in hindi

SATA Disadvantages

SATA Hard Disk PATA की तरह आज भी Mechanical Based हैं।
SATA Hard Disk Mechanical होने के कारण बहुत जल्दी Crash हो जाते हैं।
SATA Hard Disk गलती से भी गिर-पड़ जाये तो खराब होने के
Chances बढ़ जाते हैं।
SATA के Revision 1.0 का Port काफी कमजोर टाईप के थे जो टूट जाया करते थे।
SATA Cable First Revision के Cable में Locking Mechanism नहीं था। जिस कारण Cable अपने Port में से आसानी से खिंच जाया करते थे।



निष्कर्ष-

आज के इस पोस्ट में आपने SATA उसके Revision और Advantage और Disadvantage के बारे में अच्छे से आसान तरीके से जाना। 
उम्मीद है कि ये पोस्ट आपको पसंद आयी होगी और बहुत सारे आपके कन्फयूजन भी दूर हुए होंगे।

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